EN
EN English
M'Cheyne Bible Journey
Bible Reading Plan — M'Cheyne One Year
Follow this Bible Reading Plan through four passages a day—the Old Testament once and the New Testament and Psalms twice a year.
KO Korean
EN English
CN Chinese
JP Japanese
PH Philippine languages
HI Hindi
BN Bengali
TA Tamil
TE Telugu
ML Malayalam
FA Persian
MY Burmese
NE Nepali
MR Marathi
KN Kannada
HA Hausa
YO Yoruba
SW Swahili
IG Igbo
ID Indonesian
PT Portuguese
VI Vietnamese
AR Arabic
RU Russian
UK Ukrainian
RO Romanian
IT Italian
FI Finnish
TO Tongan
HR Croatian
SR Serbian
TR Turkish
HU Hungarian
PL Polish
SK Slovak
LA Latin
NL Dutch
CS Czech
FR French
ES Spanish
DE German
OT Other languages
Reading confirmation
Did you finish this M'Cheyne day?
Confirm it to mark this day complete on your M'Cheyne progress chart.
사무엘하 23
The Last Words of David
1यह दावीद द्वारा भेजा उनका आखिरी वचन है:
2“याहवेह के आत्मा मेरे द्वारा बातें करते रहे हैं.
3इस्राएल के परमेश्वर ने,
4वह सुबह की आभा के समान है, जब सूर्योदय हो रहा होता है,
5“क्या यह तथ्य नहीं,
6निकम्मे व्यक्ति फेंक दी गई कंटीली झाड़ियों के समान हैं,
7जो व्यक्ति इन्हें इकट्ठा करने का काम करता है,
David's Mighty Men
8दावीद द्वारा सेना में शामिल वीर योद्धाओं के नाम:
9इन तीन शूरवीरों में दूसरा पद था अहोही के पुत्र दोदो के पुत्र एलिएज़र का. वही उस समय दावीद के साथ था, जब वे युद्ध के लिए मोर्चा बांधे फिलिस्तीनियों की ओर बेधड़क आगे बढ़ते गए, जबकि इस्राएली सेना पीछे हट चुकी थी.
10आगे बढ़कर उसने फिलिस्तीनियों का संहार करना शुरू कर दिया, जब तक उसके हाथ थक न गए. उसका हाथ मानो तलवार से चिपक गया था. उस दिन याहवेह द्वारा प्रदान की गई विजय अद्भुत थी. इसके बाद सैनिक वहां आए अवश्य, मगर सिर्फ मृतकों की सामग्री लूटने.
11इसके बाद नामित है हरारी अगी का पुत्र शम्माह. फिलिस्ती सेना लेही नामक स्थल पर मोर्चा बांधे एकत्र थी. वहां मतूर का खेत था. लोग फिलिस्तीनियों से डरकर भाग रहे थे.
12उसने खेत के बीच में रहते हुए उनका सामना किया, उस खेत की रक्षा करते रहे, और फिलिस्तीनियों को मार गिराया. याहवेह ने बड़ी जीत के द्वारा उनकी रक्षा की.
13कटनी के अवसर पर चट्टान में अदुल्लाम गुफा में तीस प्रमुख अधिकारियों में से तीन दावीद से भेंटकरने गए. इस समय, रेफाइम की फिलिस्तीनी सेना घाटी में शिविर डाले हुए थे.
14इस समय दावीद गढ़ में थे, और फिलिस्तीनी सेना बेथलेहेम में.
15बड़ी इच्छा से दावीद कह उठे, “कैसा सुखद होता अगर कोई बेथलेहेम फाटक के पास के कुएं से मुझे पीने के लिए पानी ला देता!”
16यह सुन ये तीन वीर योद्धा फिलिस्तीनियों के शिविर में से बचते-बचाते जाकर उस कुएं से, जो बेथलेहेम के द्वार के निकट था, दावीद के लिए जल ले आए. मगर दावीद ने वह जल पिया नहीं, उन्होंने उसे याहवेह के सामने उंडेल दिया.
17उन्होंने कहा, “याहवेह, मुझसे यह काम कभी न हो. क्या, यह जल इन वीरों का लहू समान नहीं, जो अपने प्राण जोखिम में डाल मेरे लिए यह लाए हैं?” इसलिये दावीद ने वह जल नहीं पिया.
18ज़ेरुइयाह का पुत्र, योआब का भाई अबीशाई तीस सैनिकों पर अधिकारी था. उसने तीन सौ पर अपनी बर्छी घुमाई और उनको मार गिराया. उसने भी उन तीनों के समान प्रतिष्ठा प्राप्त की.
19तीसों में वही सबसे अधिक प्रख्यात था. वह उनका प्रधान बन गया, मगर वह उन तीनों में से एक न था.
20कबज़ीएल के एक वीर के पोते, यहोयादा के पुत्र, बेनाइयाह ने बड़े-बड़े काम किए थे, उसने मोआब के अरीएल के दो पुत्रों को मार गिराया. उसने ही उस दिन, जब बर्फ गिर रही थी, जाकर एक गड्ढे में बैठे सिंह का वध किया था.
21उसने एक बड़ा सा मिस्री का भी वध किया. उस मिस्री के हाथ में भाला अवश्य था मगर बेनाइयाह ने जाकर अपनी छड़ी से उसके भाले को उससे छीन लिया और उस मिस्र का वध उसी के भाले के कर दिया.
22यहोयादा के पुत्र बेनाइयाह ने ये सारे काम किए, और उन तीन वीरों के समान प्रतिष्ठा प्राप्त की.
23वह उन तीसों में ही प्रख्यात हुआ, मगर उन तीन के तुल्य नहीं. दावीद ने उसे अपने अंगरक्षक का अधिकारी नियुक्त कर दिया.
24तीस योद्धाओं के समूह में अन्य व्यक्ति ये थे:
25हेरोदी शम्माह,
26पेलेथी हेलेस,
27अनाथोथी अबीएज़ेर,
28अहोही सलमोन,
29नेतोफ़ाही के बाअनाह का पुत्र हेलेब,
30पिराथोनी बेनाइयाह,
31अरबाथवासी अबीअल्बोन,
32शालबोनी एलीअहाब,
33हरारी शम्माह का पुत्र,
34माकाहथि का अहसबै का पुत्र एलिफेलेत,
35कर्मेली हेस्रो,
36ज़ोबाह के नाथान का पुत्र यिगाल;
37अम्मोनवासी सेलेक,
38इथरी ईरा
39और हित्ती उरियाह.
갈라디아서 3
The Spirit Received Not by the Law
1निर्बुद्धि गलातियो! किसने तुम्हें सम्मोहित कर दिया? तुम्हारे सामने तो मसीह येशु को साफ़-साफ़ क्रूस पर दिखाया गया था.
2मैं तुमसे सिर्फ यह जानना चाहता हूं: पवित्र आत्मा तुमने व्यवस्था के नियम-पालन द्वारा प्राप्त किया या ईश्वरीय सुसमाचार को सुनने और उसमें विश्वास करने के द्वारा?
3क्या तुम इतने निर्बुद्धि हो? जो पवित्र आत्मा द्वारा शुरू किया गया था क्या वह मनुष्य के कार्यों से सिद्ध बनाया जा रहा है?
4तुमने इतने दुःख उठाए तो क्या वे वास्तव में व्यर्थ थे?
5परमेश्वर, जो तुम्हें अपना आत्मा प्रदान करते तथा तुम्हारे बीच चमत्कार करते हैं, क्या यह वह व्यवस्था का पालन करने के द्वारा करते हैं या विश्वास के साथ सुनने के द्वारा?
Abraham's Faith and the Curse of the Law
6जैसे अब्राहाम ने “परमेश्वर में विश्वास किया, और यह उनके लिए धार्मिकता माना गया.”
7इसलिये अब यह भली-भांति समझ लो कि जिन्होंने विश्वास किया है वे ही अब्राहाम की संतान हैं.
8पवित्र शास्त्र ने पहले से जानकर कि परमेश्वर गैर-यहूदियों को विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराएंगे, पहले ही अब्राहाम को यह शुभ संदेश देते हुए कहा था: “सभी राष्ट्र तुममें आशीषित होंगे.”
9इसलिये वे सभी, जो विश्वास करते हैं, अब्राहाम—विश्वास पुरुष—के साथ, जो स्वयं विश्वासी थे, आशीषित किए जाते हैं.
10वे, जो व्यवस्था के कार्यों पर निर्भर हैं, शापित हैं क्योंकि पवित्र शास्त्र का वर्णन है: “शापित है वह, जो व्यवस्था के हर एक नियम का पालन नहीं करता.”
11यह स्पष्ट है कि व्यवस्था के द्वारा परमेश्वर के सामने कोई भी धर्मी नहीं ठहरता; क्योंकि लिखा है: “वह, जो धर्मी है, विश्वास से जीवित रहेगा.”
12फिर भी, व्यवस्था विश्वास पर आधारित नहीं है, “इसके विपरीत, जो इसका अनुसरण करेगा, वह इसके कारण जीवित रहेगा.”
13मसीह ने स्वयं शाप बनकर हमें व्यवस्था के शाप से मुक्त कर दिया, जैसा कि लिखा है: “शापित है हर एक, जो काठ पर लटकाया जाता है.”
14यह सब इसलिये कि मसीह येशु में अब्राहाम की आशीषें गैर-यहूदियों तक आएं और हम विश्वास द्वारा प्रतिज्ञा की हुई पवित्र आत्मा प्राप्त करें.
The Promise Precedes the Law
15प्रिय भाई बहनो, मैं सामान्य जीवन से उदाहरण दे रहा हूं. एक मानवीय वाचा की पुष्टि के बाद उसे न तो कोई अलग करता है और न ही उसमें कुछ जोड़ता है.
16प्रतिज्ञाएं अब्राहाम और उनके वंशज से की गई थी. वहां यह नहीं कहा गया “वंशजों से,” मानो अनेकों से परंतु एक ही से अर्थात् “वंशज से,” अर्थात् मसीह से.
17मेरे कहने का मतलब यह है: परमेश्वर ने अब्राहाम से एक वाचा स्थापित की तथा उसे पूरा करने की प्रतिज्ञा भी की. चार सौ तीस वर्ष बाद दी गई व्यवस्था न तो परमेश्वर की वाचा को मिटा सकती है और न परमेश्वर की प्रतिज्ञा को.
18यदि मीरास का आधार व्यवस्था है तो मीरास प्रतिज्ञा पर आधारित हो ही नहीं सकती, किंतु परमेश्वर ने अब्राहाम को यह मीरास प्रतिज्ञा द्वारा ही प्रदान की.
19तब क्या उद्देश्य है व्यवस्था का? अपराध का अहसास. उसे स्वर्गदूतों द्वारा एक मध्यस्थ के माध्यम से आधिकारिक रूप से उस वंशज के आने तक बनाये रखा गया जिसके विषय में प्रतिज्ञा की गई थी.
20सिर्फ एक पक्ष के लिए मध्यस्थ आवश्यक नहीं होता, जबकि परमेश्वर सिर्फ एक हैं.
21तो क्या व्यवस्था परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विपरीत है? बिलकुल नहीं! यदि कोई ऐसी व्यवस्था दी गई होती, जो जीवन प्रदान कर सकती थी, तब निश्चयतः उस व्यवस्था के पालन करने पर धार्मिकता प्राप्त हो जाती.
22किंतु पवित्र शास्त्र ने यह स्पष्ट किया कि पूरा विश्व पाप की अधीनता में है कि मसीह येशु में विश्वास करने के द्वारा प्रतिज्ञा उन्हें दी जा सके, जो विश्वास करते हैं.
Children of God Through Faith
23मसीह येशु में विश्वास के प्रकाशन से पहले हम व्यवस्था के संरक्षण में रखे गए, उस विश्वास से अनजान, जो प्रकट होने पर था.
24इसलिये व्यवस्था हमें मसीह तक पहुंचाने के लिए हमारा संरक्षक हुआ कि हम विश्वास द्वारा धर्मी ठहराए जाएं.
25परंतु अब, जब विश्वास आ चुका है, हम संरक्षक के अधीन नहीं रहे.
26इसलिये तुम सब मसीह येशु में विश्वास द्वारा परमेश्वर की संतान हो,
27तुम सबने जो मसीह में बपतिस्मा लिया है, मसीह को धारण कर लिया है.
28इसलिये अब न कोई यहूदी है, न कोई यूनानी; न कोई स्वतंत्र है, न कोई दास और न कोई पुरुष है, न कोई स्त्री क्योंकि तुम सब मसीह येशु में एक हो.
29यदि तुम मसीह के हो, तो तुम अब्राहाम के वंशज हो, परमेश्वर की प्रतिज्ञा के वारिस.
에스겔 30
The Day of the Lord Coming Upon Egypt
1याहवेह का वचन मेरे पास आया:
2“हे मनुष्य के पुत्र, भविष्यवाणी करो और कहो: ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है:
3क्योंकि वह दिन निकट है,
4मिस्र के विरुद्ध एक तलवार उठेगी,
5कूश और पूट, लूद और पूरा अरब, लिबिया और वाचा बांधे हुए देश के लोग मिस्र के साथ तलवार से मारे जाएंगे.
6“ ‘याहवेह का यह कहना है:
7वे निर्जन देशों के बीच
8जब मैं मिस्र में आग लगाऊंगा,
9“ ‘उस दिन संदेशवाहक अपने को सुरक्षित समझते हुए मेरे पास से कूश को डराने के लिये पानी जहाजों में जाएंगे. मिस्र के विनाश के दिन वे पीड़ा से भर जाएंगे, क्योंकि इसका होना निश्चित है.
10“ ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है:
11नबूकदनेज्ज़र और उसकी सेना को, जो सारे राष्ट्रों में सबसे क्रूर हैं—
12मैं नील नदी का पानी सुखा दूंगा
13“ ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है:
14मैं ऊपरी मिस्र को उजाड़ दूंगा,
15सिन पर, जो मिस्र का दृढ़ नगर है,
16मैं मिस्र पर आग लगा दूंगा;
17ओन तथा पी-बेसेथ नगर के युवा
18जब मैं मिस्र के जूआ को तोड़ूंगा,
19इस प्रकार मैं मिस्र को दंड दूंगा,
The Prophecy of Pharaoh's Broken Arm
20ग्यारहवें वर्ष के, पहले माह के सातवें दिन, याहवेह का वचन मेरे पास आया:
21“हे मनुष्य के पुत्र, मैंने मिस्र के राजा फ़रोह की भुजा को तोड़ दिया है. उसके उपचार के लिए उसे बांधा नहीं गया है या उस पर पट्टी नहीं बांदी है कि वह मजबूत होकर तलवार पकड़ सके.
22इसलिये परम प्रधान याहवेह का यह कहना है: मैं मिस्र के राजा फ़रोह के विरुद्ध हूं. मैं उसके दोनों भुजाओं को तोड़ दूंगा—अच्छी भुजा के साथ टूटी हुई भुजा भी, और उससे हाथ से तलवार को गिरा दूंगा.
23मैं मिस्रियों को जनताओं के लोगों के बीच इधर-उधर फैला दूंगा और देश-देश में उन्हें तितर-बितर कर दूंगा.
24मैं बाबेल के राजा की भुजाओं को मजबूत करूंगा और अपनी तलवार उसके हाथ में दे दूंगा, पर मैं फ़रोह की भुजाओं को तोड़ डालूंगा, और वह बाबेल के राजा के सामने ऐसे कराहेगा, जैसे एक घायल मरनेवाला व्यक्ति कराहता है.
25मैं बाबेल के राजा की भुजाओं को मजबूत करूंगा, किंतु फ़रोह की भुजाएं पंगु हो जाएंगी. तब वे जानेंगे कि मैं याहवेह हूं, जब मैं अपनी तलवार बाबेल के राजा के हाथ में दे दूंगा और वह इसका उपयोग मिस्र के विरुद्ध करेगा.
26मैं मिस्रियों को जाति-जाति के लोगों के बीच फैला दूंगा और उन्हें देश-देश में तितर-बितर कर दूंगा. तब वे जानेंगे कि मैं याहवेह हूं.”
시편 78:38-72
38फिर भी परमेश्वर उनके प्रति कृपालु बने रहे;
39परमेश्वर को यह स्मरण रहा कि वे मात्र मनुष्य ही हैं—पवन के समान,
40बंजर भूमि में कितनी ही बार उन्होंने परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया,
41बार-बार वे परीक्षा लेकर परमेश्वर को उकसाते रहे;
42वे परमेश्वर की सामर्थ्य को भूल गए,
43जब परमेश्वर ने मिस्र देश में चमत्कार चिन्ह प्रदर्शित किए,
44परमेश्वर ने नदी को रक्त में बदल दिया;
45परमेश्वर ने उन पर कुटकी के समूह भेजे, जो उन्हें निगल गए.
46परमेश्वर ने उनकी उपज हासिल टिड्डों को,
47उनकी द्राक्षा उपज ओलों से नष्ट कर दी गई,
48उनका पशु धन भी ओलों द्वारा नष्ट कर दिया गया,
49परमेश्वर का उत्तप्त क्रोध,
50परमेश्वर ने अपने प्रकोप का पथ तैयार किया था;
51मिस्र के सभी पहलौठों को परमेश्वर ने हत्या कर दी,
52किंतु उन्होंने भेड़ के झुंड के समान अपनी प्रजा को बचाया;
53उनकी अगुवाई ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की, फलस्वरूप वे अभय आगे बढ़ते गए;
54यह सब करते हुए परमेश्वर उन्हें अपनी पवित्र भूमि की सीमा तक,
55तब उन्होंने जनताओं को वहां से काटकर अलग कर दिया
56इतना सब होने के बाद भी उन्होंने परमेश्वर की परीक्षा ली,
57अपने पूर्वजों के जैसे वे भी अकृतज्ञ तथा विश्वासघाती हो गए;
58उन्होंने देवताओं के लिए निर्मित वेदियों के द्वारा परमेश्वर के क्रोध को भड़काया है;
59उन्हें सुन परमेश्वर को अत्यंत झुंझलाहट सी हो गई;
60उन्होंने शीलो के निवास-मंडप का परित्याग कर दिया,
61परमेश्वर ने अपने सामर्थ्य के संदूक को बन्दीत्व में भेज दिया,
62उन्होंने अपनी प्रजा तलवार को भेंट कर दी;
63अग्नि उनके युवाओं को निगल कर गई,
64उनके पुरोहितों का तलवार से वध कर दिया गया,
65तब मानो प्रभु की नींद भंग हो गई, कुछ वैसे ही,
66परमेश्वर ने अपने शत्रुओं को ऐसे मार भगाया;
67तब परमेश्वर ने योसेफ़ के मण्डपों को अस्वीकार कर दिया,
68किंतु उन्होंने यहूदाह गोत्र को चुन लिया,
69परमेश्वर ने अपना पवित्र आवास उच्च पर्वत जैसा निर्मित किया,
70उन्होंने अपने सेवक दावीद को चुन लिया,
71भेड़ों के चरवाहे से उन्हें लेकर परमेश्वर ने
72दावीद उनकी देखभाल हृदय की सच्चाई में करते रहे;